रोमानिया
पाठ्यक्रम: GS1/चर्चा में रहे स्थान
संदर्भ
- भारत और रोमानिया ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और खेल के क्षेत्रों में सहयोग के लिए तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
परिचय
- ये समझौते, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उनके रोमानियाई समकक्ष के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद किए गए।
- भारत और रोमानिया ने अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
रोमानिया के बारे में
- रोमानिया दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक देश है। इसकी राष्ट्रीय राजधानी बुखारेस्ट है।
- इसकी सीमाएँ उत्तर में यूक्रेन, उत्तर-पूर्व में मोल्दोवा, दक्षिण-पूर्व में काला सागर, दक्षिण में बुल्गारिया, दक्षिण-पश्चिम में सर्बिया और पश्चिम में हंगरी से मिलती हैं।

- डेन्यूब डेल्टा यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे अच्छी तरह संरक्षित नदी डेल्टा है। इसका अधिकांश भाग रोमानिया में और एक छोटा भाग यूक्रेन में स्थित है।
- इसे 1991 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया था।
- 2004 में रोमानिया उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) का सदस्य बना और 2007 में यूरोपीय संघ का सदस्य बन गया।
स्रोत: AIR
दिशा 2.0
पाठ्यक्रम : GS2/शासन
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने DISHA 2.0 (Designing Innovative Solutions for Holistic Access to Justice) योजना शुरू की है। इस योजना के लिए 2026–31 की अवधि में 255 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है, ताकि इसे पूरे भारत में लागू किया जा सके।
दिशा 2.0 के बारे में
- यह विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
- DISHA 2.0 का उद्देश्य प्रौद्योगिकी का उपयोग करके कानूनी सेवाओं के लिए नागरिक-अनुकूल समाधान मंचों का विकास करना और उनकी पहुँच को बढ़ाना है।
योजना के मुख्य घटक
- टेली-लॉ (Tele-Law) मोबाइल ऐप और टोल-फ्री नंबर के माध्यम से लोगों को पैनल वकीलों से जोड़ता है, ताकि मुकदमा दायर होने से पहले कानूनी सलाह दी जा सके। इसके लिए वीडियो/टेली-कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का भी उपयोग किया जाता है।
- न्याय बंधु (Nyaya Bandhu – Pro Bono Legal Services) कार्यक्रम के तहत, वकील स्वेच्छा से विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के अंतर्गत आने वाले वंचित और कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता प्रदान करते हैं।
- विधिक साक्षरता एवं विधिक जागरूकता कार्यक्रम के तहत विभिन्न संस्थानों तथा हितधारक मंत्रालयों/विभागों के साथ साझेदारी की जाती है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाना, उन्हें कानूनी रूप से सशक्त बनाना तथा कार्यशालाओं, वेबिनार, IEC सामग्री, प्रसार भारती और अन्य संस्थाओं के सहयोग से कानूनी जागरूकता फैलाना है।
- VIDHI (Vision for Integrated Delivery of Harmonized Legal Initiatives) – संजीवनी को DISHA 2.0 के तहत एक महत्त्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एकीकृत केंद्रीय डैशबोर्ड के विकास और संचालन के माध्यम से योजना की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना है।
- इस डैशबोर्ड का उद्देश्य विभिन्न स्रोतों से प्राप्त रीयल-टाइम डेटा को एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है, ताकि कार्यक्रम के प्रदर्शन, सेवाओं की उपलब्धता और योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की प्रभावी निगरानी की जा सके।
स्रोत: PIB
राज्यसभा का नियम 176 और नियम 267
पाठ्यक्रम : GS2/शासन
चर्चा में क्यों?
- विपक्षी सदस्यों ने शैक्षिक सुधार के विरोध में प्रदर्शन किया और राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस दिया।
राज्यसभा की कार्य-प्रक्रिया नियमावली का नियम 267
- इसके अनुसार, सभापति की अनुमति से कोई सदस्य सदन के सामान्य कार्य को स्थगित कर तत्काल सार्वजनिक महत्त्व के किसी महत्त्वपूर्ण विषय पर तुरंत चर्चा करा सकता है।
- यह एक विशेष प्रक्रिया है, क्योंकि इसमें कार्यसूची को छोड़कर सीधे विषय पर चर्चा की जाती है और यह केवल सभापति की अनुमति से ही संभव है।
- यह प्रावधान नियमों के उन विशेष अध्यायों पर लागू नहीं होगा, जिनमें कार्य स्थगन के लिए अलग से प्रावधान किए गए हैं।
राज्यसभा नियमों का नियम 176
- यह सदन के निर्धारित कार्य में बाधा डाले बिना तत्काल सार्वजनिक महत्त्व के किसी विषय पर अल्पकालिक चर्चा की अनुमति देता है।
- कोई भी सदस्य महासचिव को लिखित सूचना दे सकता है। इस सूचना के साथ स्पष्टीकरण नोट संलग्न होना चाहिए तथा उस पर कम-से-कम दो अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
- यदि सभापति इस सूचना को स्वीकार कर लेते हैं, तो सदन के नेता से परामर्श करके चर्चा का समय तय किया जाता है। यह चर्चा अधिकतम ढाई घंटे तक चल सकती है।

क्या आप जानते हैं?
- वर्ष 2025 में DRDO ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था। यह बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें पूरी तरह स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत अति लघु दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की मिसाइलें तथा उच्च-शक्ति वाली लेज़र आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार शामिल हैं।
- भारत के पास रूस की S-400 ट्रायम्फ (Triumf) वायु रक्षा प्रणाली भी है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह 400 किमी तक की दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
स्रोत: BS
‘ऊंझा जीरा’ और ‘ऊंझा सौंफ’ को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग
पाठ्यक्रम: GS3/ कृषि
संदर्भ
- राजस्थान के जीरा और सौंफ उत्पादक किसानों ने ‘ऊंझा जीरा’ और ‘ऊंझा सौंफ’ के भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकरण का विरोध किया है।
परिचय
- ऊंझा एशिया की सबसे बड़ी कृषि मंडियों में से एक है, जहाँ विशेष रूप से जीरा, सौंफ और इसबगोल जैसे मसाला बीजों का व्यापार होता है।
- ऊंझा कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में बिकने वाले जीरा और सौंफ का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान से आता है।
- राजस्थान के किसानों का कहना है कि गुजरात का ऊंझा मुख्य रूप से व्यापार और विपणन का केंद्र है, न कि इन मसाला बीजों का मुख्य उत्पादन केंद्र।
भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI)
- भौगोलिक संकेतक (GI) एक ऐसा चिह्न है, जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनका विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से संबंध होता है और जिनकी विशेष गुणवत्ता, पहचान या प्रतिष्ठा उसी क्षेत्र के कारण होती है।
- किसी चिह्न को GI के रूप में मान्यता पाने के लिए यह बताना आवश्यक है कि वह उत्पाद किसी विशेष स्थान से उत्पन्न हुआ है।
- भौगोलिक संकेतक (GI) का उपयोग सामान्यतः कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, वाइन और स्पिरिट पेय, हस्तशिल्प तथा औद्योगिक उत्पादों के लिए किया जाता है।
GI टैग और भारत
- वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 भारत में वस्तुओं से संबंधित भौगोलिक संकेतकों (GI) के पंजीकरण और बेहतर संरक्षण का प्रावधान करता है।
- इस अधिनियम का प्रशासन पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क के महानियंत्रक द्वारा किया जाता है, जो भौगोलिक संकेतकों के रजिस्ट्रार भी होते हैं।
- भौगोलिक संकेतक (GI) का पंजीकरण 10 वर्ष की अवधि तक वैध रहता है।
स्रोत: IE
भव्य – रसायन योजना
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था
चर्चा में क्यों?
- प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन को मंजूरी दे दी है।
भव्य – रसायन योजना के बारे में
- इस योजना की घोषणा वित्त वर्ष 2026–27 के केंद्रीय बजट में की गई थी। इसके लिए पाँच वर्षों (वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31) की अवधि में ₹3,030 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें ₹3,000 करोड़ अवसंरचना के लिए और ₹30 करोड़ प्रशासन के लिए निर्धारित किए गए हैं।
- केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए अधिकतम ₹1,000 करोड़ तक की सहायता देगी, बशर्ते संबंधित राज्य सरकार कम-से-कम ₹500 करोड़ का योगदान दे।
- प्रत्येक पार्क का विकास चैलेंज रूट के माध्यम से कम-से-कम 2,000 एकड़ (8 वर्ग किमी.) क्षेत्र में किया जाएगा। इनमें प्लग एंड प्ले अवसंरचना उपलब्ध होगी, जिसमें सामान्य अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र, उपचार, भंडारण और निपटान सुविधाएँ, जल आपूर्ति प्रणाली, सॉल्वेंट रिकवरी यूनिट, भाप नेटवर्क, आपस में जुड़ी पाइपलाइनें, तथा लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सुविधाएँ शामिल होंगी।
लाभ
- इससे लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
- यह सामान्य अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र, उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन जैसी केंद्रीकृत सुविधाओं वाला पर्यावरण-अनुकूल तंत्र विकसित करके भारतीय रासायनिक उद्योग के सतत विकास को बढ़ावा देगा।
- इससे भारतीय रासायनिक उद्योग का वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ बेहतर एकीकरण होगा, जिससे निर्यात बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।
- यह पर्यावरणीय नियमों के बेहतर अनुपालन को सुनिश्चित करेगा, जिससे उद्योग का विकास पर्यावरण-अनुकूल तरीके से होगा।
- यह घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करके, घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर तथा रोज़गार के अवसर पैदा करके इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देगा।
- इससे इस क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन मिलेगा।
स्रोत: PIB
PRAXIS मिशन
पाठ्यक्रम: GS3/विज्ञान और प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- नासा (NASA) ने प्रैक्सिस (PRAXIS) नामक एक नवाचारी मिशन अवधारणा का चयन किया है, जिसका उद्देश्य ऐसा पहला अंतरिक्ष यान विकसित करना है जो शनि जैसे ग्रहों के वलयों से कणों को सीधे एकत्र कर उनका अध्ययन कर सके।
PRAXIS क्या है?
- PRAXIS का पूरा नाम प्लैनेटरी रिंग्स ऑटोनॉमस एक्सप्लोरेशन विद इन-सीटू सैंपलिंग (Planetary Rings Autonomous EXploration with In-situ Sampling) है।
- इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संचालित जैव-प्रेरित रोबोटिक अंतरिक्ष यान का प्रस्ताव है।
- इसका उद्देश्य ग्रहों के वलयों के कणों के नमूने सीधे एकत्र करने वाला पहला मिशन बनना है।
- मुख्य विशेषताएँ:
- जैव-प्रेरित रोबोटिक अन्वेषक: इसे प्रकृति में पाए जाने वाले कुशल संचालन और अनुकूलन क्षमता की नकल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- AI आधारित स्वायत्तता : यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके उपयुक्त वलय कणों की पहचान करेगा, नमूना संग्रह की योजना बनाएगा और बहुत कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ एकत्र किए गए आँकड़ों का विश्लेषण करेगा।
स्रोत: TH
कुशा मिसाइल
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
चर्चा में क्यों?
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के पास स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘कुशा (Kusha)’ का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है।
कुशा मिसाइल प्रणाली
- यह स्वदेशी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जो महत्त्वपूर्ण सैन्य और नागरिक परिसंपत्तियों तथा अवसंरचना को विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी।
- यह लड़ाकू विमानों, मिसाइलों, मानवरहित हवाई वाहनों तथा दुश्मन के बड़े विमानों सहित कई प्रकार के हवाई खतरों को लंबी दूरी और विभिन्न ऊँचाइयों पर निष्क्रिय करने में सक्षम है।
- लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल की मारक क्षमता सामान्यतः 200 किमी से अधिक होती है।
- इस हथियार प्रणाली के सभी घटक, जिनमें मिसाइलें, रडार, कमांड एवं नियंत्रण केंद्र शामिल हैं, DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और औद्योगिक साझेदारों द्वारा विकसित किए गए हैं।
- यह मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा है, जो वर्ष 2035 तक परस्पर जुड़ी, बहु-स्तरीय और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वायु एवं मिसाइल रक्षा कवच विकसित करने की भारत की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय रक्षा पहल है।
क्या आप जानते हैं?
- वर्ष 2025 में DRDO ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया था। यह बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली है, जिसमें पूरी तरह स्वदेशी त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, उन्नत अति लघु दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की मिसाइलें तथा उच्च-शक्ति वाली लेज़र आधारित निर्देशित ऊर्जा हथियार शामिल हैं।
- भारत के पास रूस की S-400 ट्रायम्फ (Triumf) वायु रक्षा प्रणाली भी है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह 400 किमी तक की दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।
स्रोत: IE
इंग्लैंड वर्ष 2027 में पहली बार आयोजित होने वाली मिक्स्ड डिसेबिलिटी एशेज की मेजबानी करेगा
पाठ्यक्रम: विविध
संदर्भ
- इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया 2027 में पहली बार मिक्स्ड डिसेबिलिटी एशेज खेलेंगे।
मिक्स्ड डिसेबिलिटी एशेज क्या है?
- यह इंग्लैंड पुरुष मिश्रित दिव्यांग टीम और ऑस्ट्रेलिया पुरुष मिश्रित दिव्यांग टीम के बीच आयोजित होने वाली पहली एशेज शृंखला है।
- यह शृंखला टी20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) प्रारूप में खेली जाएगी।
- यह वर्ष 2027 में इंग्लैंड के एशेज समर का हिस्सा होगी, जिसमें पुरुष और महिला एशेज शृंखलाएँ भी शामिल होंगी।
- मिश्रित दिव्यांग क्रिकेट एक समावेशी प्रारूप है, जिसमें अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक ही टीम में, समान खेल नियमों के तहत, साथ मिलकर खेलते हैं।
एशेज़ का इतिहास
- एशेज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की सबसे पुरानी द्विपक्षीय क्रिकेट शृंखलाओं में से एक है, जो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाती है। इसकी शुरुआत वर्ष 1882 में हुई थी।
- एशेज़ की शुरुआत:
- अगस्त 1882 में ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार इंग्लैंड की धरती पर लंदन के द ओवल मैदान में इंग्लैंड को हराया।
- इस हार के बाद ब्रिटिश समाचार पत्र द स्पोर्टिंग टाइम्स ने व्यंग्यात्मक शोक-संदेश प्रकाशित किया, जिसमें लिखा था कि “अंग्रेज़ी क्रिकेट की मृत्यु हो गई है, उसके शरीर का दाह संस्कार किया जाएगा और उसकी राख ऑस्ट्रेलिया ले जाई जाएगी।”
- इस वाक्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया और इसी से “द एशेज” नाम की शुरुआत हुई।
- सीरीज़ का विकास:
- शुरुआत में एशेज में केवल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की पुरुष टीमों के बीच टेस्ट मैच खेले जाते थे, जो सामान्यतः हर दो वर्ष में आयोजित होते थे।
- महिला एशेज : इसकी शुरुआत 1934–35 में हुई थी। यह इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की महिला राष्ट्रीय टीमों के बीच खेली जाती है।
- ब्लाइंड एशेज : इसकी शुरुआत 2004 में हुई थी। इसमें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की दृष्टिबाधित (Blind) क्रिकेट टीमें भाग लेती हैं।
- मिश्रित दिव्यांग एशेज : इसका पहला संस्करण वर्ष 2027 में आयोजित किया जाएगा।
स्रोत: DD News
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